Highlights
- अमेरिका ने ईरान के पुलों और सैन्य ठिकानों पर हमले तेज किए, कई इलाकों में मची तबाही।
- ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर मिसाइल एवं ड्रोन दागे, क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा।
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते संघर्ष से तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर संकट गहराया।
दुबई: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिका ने ईरान के कई नए इलाकों में हवाई हमले किए, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे। बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, इसलिए इन हमलों को क्षेत्रीय तनाव में बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, दक्षिणी होरमोज़गान प्रांत में पुलों को निशाना बनाकर किए गए अमेरिकी हवाई हमलों में कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई।
अमेरिकी सेना ने जहाज पर भी किया अटैक
गुरुवार को अमेरिका ने अपने हमलों का दायरा बढ़ाते हुए ईरान के और अधिक पुलों को निशाना बनाया। इसके अलावा अमेरिकी सेना ने एक ऐसे जहाज पर भी हमला किया, जिस पर आरोप है कि वह ईरान पर लगाए गए अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। अमेरिका ने कहा कि उसने देर रात दूसरी लहर के हमले इसलिए किए ताकि ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर किया जा सके। इस बार हमले पहली बार राजधानी तेहरान के आसपास के इलाकों तक भी पहुंचे, जिससे साफ है कि अमेरिकी कार्रवाई अब और व्यापक होती जा रही है।
2 पुलों पर हुए हमले में 3 लोगों की मौत
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी हमलों में तेहरान, सेमनान प्रांत, हमदान, होरमोज़गान, खुज़ेस्तान, लोरेस्तान, मरकज़ी, सिस्तान-बलूचिस्तान और क़ेश्म द्वीप को निशाना बनाया गया। सेमनान प्रांत को ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन और अंतरिक्ष कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र माना जाता है। बंदर अब्बास के अल्लाह-अकबर हिल रिहायशी इलाके पर हुए हमले में 7 लोग घायल हुए। वहीं बंदर अब्बास रेलवे जंक्शन पर हुए हमले में 2 अन्य लोग घायल हो गए। शहर के पश्चिम में 2 पुलों पर हुए हमले में 3 लोगों की मौत और 9 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है।
ईरान के मिसाइल ठिकाने बने निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उसने ग्रेटर तुंब द्वीप पर ईरान के रक्षा और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया। यह द्वीप फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संगम पर स्थित 3 छोटे द्वीपों में से एक है। वर्ष 1971 में ईरान ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था। इन द्वीपों के कारण ईरान को होर्मुज पर महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त मिलती है। अमेरिकी सेना ने यह भी दावा किया कि उसने कुरासाओ के झंडे वाले एक तेल टैंकर को निष्क्रिय कर दिया, जो ईरान के मुख्य ऑइल एक्सपोर्ट टर्मिनल की ओर जा रहा था। अमेरिका का कहना है कि जहाज ने कई चेतावनियों को नजरअंदाज किया, जिसके बाद उस पर मिसाइल दागी गई।
बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर हुए हमले
इसके जवाब में ईरान ने गुरुवार को बहरीन, कुवैत और जॉर्डन की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन देशों की सरकारों ने हमलों की पुष्टि की है, हालांकि किसी बड़े नुकसान या हताहत होने की तत्काल जानकारी नहीं दी गई। इस बीच इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने उत्तरी कुर्द क्षेत्र में हुए ड्रोन हमले की निंदा की। अधिकारियों के अनुसार ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया गया। यह घटना ऐसे समय हुई जब इराकी प्रधानमंत्री अमेरिका की यात्रा पर हैं, जहां उन्होंने ईरान समर्थित समूहों सहित गैर-सरकारी हथियारबंद संगठनों को निरस्त्र करने की दिशा में काम करने की बात कही।
होर्मुज पर नियंत्रण के लिए छिड़ी है जंग
पिछले महीने युद्ध रोकने के लिए हुआ अंतरिम युद्धविराम अब पूरी तरह टूट चुका है। इसके बाद से अमेरिका और ईरान लगातार एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। यह संघर्ष मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर है। जब अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब ईरान ने प्रभावी रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए बंद कर दिया था। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और ईरान को बातचीत में बड़ा दबाव बनाने का मौका मिला।
'होर्मुज में हस्तक्षेप नहीं करने देंगे'
ईरानी सेना के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वॉर्टर के प्रवक्ता कर्नल इब्राहिम ज़ोल्फाघारी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनियों के मुताबिक अमेरिका ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमले जारी रखता है, तो ईरान पूरे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे पर व्यापक हमले कर सकता है। उन्होंने कहा, 'किसी भी परिस्थिति में और किसी भी तरीके से हम अमेरिका जैसे बाहरी और क्षेत्र से बाहर के देश को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हस्तक्षेप नहीं करने देंगे। यह ईरान की अटल लाल रेखा है।'
बुधवार से जारी है अमेरिका की नाकेबंदी
दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि शांति समझौते की संभावना अभी भी बनी हुई है, हालांकि जमीनी हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका ने बुधवार को ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू कर दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसने नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे 3 व्यावसायिक जहाजों का रास्ता बदल दिया, एक जहाज को निष्क्रिय किया और एक अन्य पर चढ़कर उसकी जांच की। सेंट्रल कमांड ने X पर कहा, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और आसपास का समुद्री क्षेत्र खुला और सुरक्षित है। केवल वे जहाज प्रभावित होंगे जो अमेरिका की मजबूत नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश करेंगे।'
होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटी
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि अमेरिका ताकत के जरिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने की कोशिश करता है, तो इसके लिए कहीं बड़े नौसैनिक बेड़े और हजारों जमीनी सैनिकों की जरूरत होगी। इस बीच समुद्री डेटा कंपनी लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार, महीने की शुरुआत में ही होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले साप्ताहिक मालवाहक जहाजों की संख्या लगभग 25 प्रतिशत घट गई थी। हाल के हमलों के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। बढ़ते खतरे को देखते हुए कुछ तेल टैंकर अपने लोकेशन इक्विपमेंट्स बंद करके यात्रा कर रहे हैं, जबकि कई जहाज फिलहाल समुद्र में ही रुके हुए हैं।
ये भी पढ़ें: ईरान ने अमेरिका से बातचीत से किया इनकार, कहा- 'फिलहाल पूरा ध्यान देश की रक्षा पर'